राजस्थान पर्यटन - शाही महिमा की ओर बढ़ता हुआ कारवां
जब हम राजस्थान की बात करते हैं तो आपके जहन में क्या आता है ? सुन्दर महल, ऊंट की राजसी सवारी ? वीर किवदंतियां रोमांटिक कहानियाँ, जीवंत संस्कृति और आकर्षक विरासत? क्या यहां बताई गयी बातों में सिमट गया है राजस्थान शायद आप हां कहें । चाहिए कोई बात नहीं "राजाओं की भूमि" इससे कहीं अधिक है इससे कहीं विस्तृत है।
राजस्थान, एक अविश्वसनीय रूप से सुंदर राज्य भारत के उत्तर पश्चिम में मौजूद है जो अपने आप में कालातीत आश्चर्य का जीवंत उदहारण है, अगर व्यक्ति यात्रा का पारखी है तो उसे यहां जरूर जाना चाहिए। हम इस बात की पूरी गारंटी लेते हैं की वो कभी भी अपनी इस यात्रा को भूल नहीं पायेगा अतः वो यहां एक बार जरूर जाये। प्राचीन वास्तुकला एक चमत्कार के तौर पर राजस्थान को और भी अधिक रॉयल बनाती है जो राजस्थान रॉयल्स की समृद्धि का एक जीवंत उदाहरण है। राजस्थान का शुमार दुनिया की उन जगहों में है जो अपने यहाँ आने वालों को बहुत कुछ देता है । आइये विस्तार से राजस्थान के हर एक पहलुओं पर नज़र डाली जाये।
इस ऐतिहासिक राज्य की स्थलाकृति
देश के पश्चिमोत्तर की ओर स्थित, राजस्थान भारत गणराज्य में क्षेत्र से सबसे बड़ा राज्य है। ये राज्य भारत के 10.4% भाग को अपने में समेटे हुए है जिसमें 342,269 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र शामिल है। गुलाबी नगरी जयपुर यहाँ की राजधानी है जबकि अरावली रेंज में स्थित माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है। राजस्थान का पश्चिमोत्तर भाग काफी शुष्क और रेतीले है जिसमें से अधिकांश भाग को थार रेगिस्तान ने कवर कर रखा है।
राजस्थान की जलवायु
राजस्थान में मौसम को 3 भागों में बांटा गया है जिसमें गर्मी, मानसून और सर्दियों शामिल हैं। पूरा राज्य केवल मॉनसून को छोड़कर बाकी सारे समय शुष्क और सूखा रहता है। राज्य गर्मियों में सर्वाधिक गर्म रहता है इस दौरान यहां का पारा 48 डिग्री तक चला जाता है। पूरे राज्य में केवल माउंट आबू ही वो स्थान है जहां गर्मियों के दौरान मौसम सुखद रहता है।
राजस्थान में आपको कौन सी भाषा सुनने को मिलती है ?
राज्य की मुख्य भाषा राजस्थानी है साथ ही यहां हिन्दी और अंग्रेजी का भी इस्तेमाल व्यापक पैमाने पर किया जाता है। साथ ही यहां की पुरानी पीढ़ी यानी की बुज़ुर्ग आज भी अपनी बोली में सिन्धी भाषा का इस्तेमाल करते है।
रंगारंग संस्कृति और स्वादिष्ट व्यंजन
बात अगर राजस्थान की हो और हम यहाँ की रंगारंग संस्कृति और स्वादिष्ट व्यंजनों की बात न करें तो राजस्थान का जिक्र अधूरा है । राजस्थान राज्य संस्कृति और परंपराओं में आज भी महान समृद्धि का दावा पेश करता है। जबकि राजस्थान के स्थानीय लोगों के बीच संगीत और नृत्य अभ्यास भी बहुत ही जीवंत और आकर्षक हैं, इन बातों के अलावा ये जगह अपने लाजवाब आर्टवर्क के लिए भी जानी जाती है। यहाँ के पारंपरिक कपड़े बहुत ही कलात्मक होते हैं जिसमें शीशे के काम को देखा जा सकता है। कला और उसके प्रेमियों के लिए राजस्थान एक स्वर्ग से कम नहीं है।
राज्य में मनाये जाने वाले प्रमुख त्योहारों में होली, तीज, दीपावली, देवनारायण जयंती, संक्रांति और जन्माष्टमी का विशेष महत्त्व है । इसके अलावा, वर्ष में एक बार मनाया जाने वाला राजस्थानी रेगिस्तान त्योहार, ऊंट मेला , और पशु मेला भी राज्य के प्रमुख उत्सवों में अपनी जगह रखते हैं।
राज्य में पानी के आभाव के चलते आपको यहां ताज़ी सब्जियों में कमी दिखाई देगी। जिसके चलते प्रायः यहां का मुख्य भोजन शुष्क होता है। लेकिन इन बातों के बावजूद यहां के भोजन की जितनी तारीफ की जाये उतनी कम है। अगर यहां के पारंपरिक भोजन की बात की जाये तो इसमें दाल भाटी, बेल गट्टे, रबड़ी, बाजरे की रोटी और लहसुन की चटनी मावा कचौड़ी और बीकानेर ने रसगुल्लों को शामिल किया गया है। अगर आप राजस्थान में हैं तो इन भोजनों को खाने में ज़रा भी संकोच मत कीजिये।
जब आप "राजाओं की भूमि" पर हों तो महलों की सैर करना मत भूलिए!
जैसा की हमने आपको राजस्थान के भूगोल, जलवायु और संस्कृति के बारे में सब कुछ बता दिया है, लेकिन अब जो हम आपको बताने वाले हैं वो कुछ ख़ास है अब हम आपको बताएँगे जब आप इस राज्य में हों तो आप कहाँ अपना डेरा डालें। राजस्थान का हर एक भाग पर्यटन की दृष्टि से अपने आप में रॉयल और खूबसूरत है साथ ही यहाँ ऐसा बहुत कुछ है जो आपका मन मोह लेगा। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर जैसे खूबसूरत शहरों को अपने में समेटने वाले इस राज्य में घूमने से नहीं रोक पाएंगे आप। इसके अलावा यहाँ बांसवाड़ा, कोटा, भरतपुर, बूंदी, विराट नगर, सरिस्का और शेखावाटी जैसे भी शहर हैं जो आपकी यात्रा को और भी अधिक रोचक और यादगार बनाएंगे।
प्रकृति प्रेमियों और वन्य जीवन में रूचि रखने वाले लोगों के लिए भी यहाँ बहुत कुछ है। रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, सरिस्का टाइगर रिजर्व, दरा वन्य प्राणी अभयारण्य और कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य यहाँ आने वाले प्रकृति प्रेमियों को हर वो चीज़ देते हैं जिनकी उनको चाह रहती है। यहाँ कई सारे हिन्दू और जैन मंदिर के अलावा पूजा पाठ के कई महत्त्वपूर्ण स्थान भी हैं। इतिहास और वास्तु में रूचि रखने वालों को भी ये राज्य बहुत कुछ देता है । राजस्थान में स्थित हर एक महल, हवेली, किला एक उम्दा वास्तुकला को दर्शाता है।
अतः भारत में स्थित राजस्थान राज्य एक यादगार डेस्टिनेशन है यहां आप जरूर आइये यहाँ कोई न कोई ऐसी चीज जरूर होगी जो आपकी यात्रा को यादगार बना देगी। अंत में हम प्रसिद्द लैटिन दार्शनिक और बिशप सेंट ऑगस्टाइन की एक पंक्ति से आपको जरूर अवगत कराना चाहेंगे " ये दुनिया एक किताब और जो लोग यात्रा नहीं करते उन्होंने अपने जीवन में केवल एक ही पृष्ठ पढ़ा है।"
नागौर - एक मनोरम शहर
नागौर, राजस्थान राज्य में स्थित एक ऐतिहासिक शहर है। इस शहर को नागा क्षत्रियों के द्वारा स्थापित किया गया था। नागौर शहर, नागौर जिले के मुख्यालय के रूप में जाना जाता है। यह शहर दो लोकप्रिय पर्यटन स्थलों बीकानेर और जोधपुर के बीच में स्थित है।
इतिहास और पौराणिक कथाओं में नागौर
इस जगह के इतिहास के बारे में महान महाकाव्य महाभारत के दिनों से पता लगाया जा सकता है। यह कहा जाता है कि वर्तमान नागौर जिले के कुछ क्षेत्र, उस काल के अहिच्छत्रपुर राज्य का हिस्सा हुआ करते थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महान अर्जुन ने अहिच्छत्रपुर पर विजय प्राप्त की और उसे अपने गुरू को द्रोणाचार्य को भेंट किया।
नागौर में और उसके आसपास क्या - क्या देखने के लिए है ?
यह शहर नागौर किले के लिए प्रसिद्ध है जो एक रेतीला किला है। इसका निर्माण 2 सदी में नागावंशियों द्वारा किया गया था। इस किले में सुंदर महल, फव्वारे, मंदिर और बगीचे हैं। इस किले के अलावा, नागौर में तरकीन दरगाह भी एक लोकप्रिय और आकर्षक पर्यटन स्थल है। यह दरगाह, इस्लाम धर्म के अनुयायियों में विशाल धार्मिक महत्व रखती है।
नागौर सैर का प्लान बना रहे पर्यटक यहां आकर जैन ग्लास मंदिर भी देख सकते हैं जो शहर के कमला टावर के पीछे स्थित है। यह एक काफी अनोखी संरचना है जो पूरी तरह कांच से बनी हुई है। मंदिर में अंदर के हिस्सों में शीशे का काम, यहां के दृश्य को और भी आकर्षक बनाता है। पर्यटक इस मंदिर में जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों के बारे में विशाल आंकड़ें पा सकते हैं। इसके अलावा, साईजी का टंका भी नागौर में भ्रमण के लिए एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है।
नागौर शहर अपने मुग्ध कर देने वाले महलों जैसे - हादी रानी महल, दीपक महल, अकबरी महल और रानी महल आदि के लिए भी प्रसिद्ध है। यह सभी महल अपने आसाधारण वास्तुकला और इंटीरियर डिजायन के लिए जाने जाते हैं। नागौर की सैर के दौरान पर्यटक, अमर सिंह राठौड़ की कब्र, वंशीवाला मंदिर, नाथ जी की छतरी और बरली भी देख सकते हैं।
नागौर पहुंचना
नागौर शहर तक वायु, रेल और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस जगह का सबसे नजदीकी घरेलू हवाई अड्डा जोधपुर में
स्थित है। हालांकि, विदेशी पर्यटक नागौर तक दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे से पहुंच सकते हैं जो नागौर का निकटतम इंटरनेशनल एयरबेस है। यह हवाई अड्डा, भारत के के कई गंतव्य स्थलों से नियमित उड़ानों के द्वारा जुड़ा हुआ है।
यात्री रेल से भी अपने गंतव्य स्थल तक पहुंच सकते हैं। नागौर रेलवे स्टेशन प्रतिदिन चलने वाली ट्रेनों के द्वारा जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और दिल्ली से जुड़ा हुआ है। नागौर के लिए अजमेर, बीकानेर, दिल्ली,जोधपुर और जयपुर से बसें भी उपलब्ध हैं, इस तरह यह शहर सड़क मार्ग में भली - भांति जुड़ा हुआ है।
जलवायु
कम बारिश होने के कारण नागौर की जलवायु साल भर गर्म और शुष्क रहती है। यहां के प्राथमिक मौसम गर्मी, मानसून और सर्दी हैं। नागौर में छुट्टियां बिताने का प्लान बनाने वाले पर्यटकों को अक्टूबर से नवंबर के महीने के बीच में आने की सलाह दी जाती है क्यूंकि इस दौरान मौसम अन्य समय की अपेक्षा हल्का सा सर्द और खुशनुमा होता है।
नागौर किला, नागौर
नागौर किला, नागौर शहर में स्थित एक प्रमुख और आकर्षक पर्यटन स्थल है। यह एक सुंदर रेतीला गढ़ है जिसे 2 सदी में बनाया गया था। यह किला बीते युग में लड़े गए कई लड़ाईयों का गवाह है। यह राजस्थान का सबसे अच्छा सपाट भूमि पर बना किला है जो अपनी ऊंची दीवारों और विशाल परिसर के लिए प्रसिद्ध है।
पर्यटक किले के अंदर आकर कई महलों, फव्वारे, मंदिरों और खूबसूरत बगीचों को देख सकते हैं। इस किले का निर्माण नागावंशियों के द्वारा किया गया था और बाद में किले को मोहम्मद बहलीन द्वारा पुनर्निर्मित करवाया गया।
किले के तीन मुख्य प्रवेश द्वार हैं, पहला प्रवेश द्वार लोहे और लकड़ी के नुकीले कीलों से मिलकर बना है जो दुश्मनों और हाथियों के हमलों से रक्षा करने के उद्देश्य से बनाया गया था। दूसरा प्रवेश द्वार बीच का पोल है और आखिरी प्रवेश द्वार कचेरी पोल है। आखिरी दरवाजे को प्राचीन काल में नागौर की न्यायपालिका के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
लाडनू - जैन देवताओं की भूमि
राजस्थान के नागौर जिले में स्थित लाडनू एक पर्यटक स्थल है। यह शहर पहले चंदेरी नगरी के नाम से जाना जाता था। यह स्थान परमश्रद्धेय व्यक्तित्व आचार्य तुलसी की जन्मस्थली है,उन्होनें अनुव्रत और जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "लिविंग विद पर्पज" में इस प्रसिद्ध व्यक्तित्व की गणना दुनिया के 15 महानतम व्यक्तियों में की थी।
इतिहास में लाडनू
लाडनू का इतिहास प्रसिद्द महाकाव्य 'महाभारत', के दिनों का है। इस महाकाव्य के वर्णनानुसार 12 वीं सदी में शिशुपाल राज्य नें लाडनू पर विजय प्राप्त की थी।तथा बाद में, 16 वीं सदी में लाडनू, जोधपुर में शामिल हो गया।
जैन मंदिरों की भूमि
यह आध्यात्मिक नगरी विशेष रूप से जैन धर्म स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। दिगंबर जैन बारा मंदिर इस जगह का सबसे लोकप्रिय मंदिर है। यह मंदिर 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। यह मंदिर जैन तीर्थंकरों की संगमरमर की 166 मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। यात्री के लिए यहां एक आर्ट गैलरी भी हैं, जिसमें जैन पांडुलिपी,प्रतिमाओं तथा प्राचीन कलाओं का एक दुर्लभ संग्रह मौजूद है। उत्कीर्ण स्तंभ एवं सुंदर डिजाइन वाले दरवाजे इस प्राचीन मंदिर की शोभा एवं आकर्षण को और अधिक बढ़ा देते हैं।लाडनू की यात्रा के दौरान पर्यटक शांतिनाथ मंदिर तथा चारभुजानाथ मंदिर की भी यात्रा सकते हैं।
जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय लाडनू का एक प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षण है। इसकी स्थापना आचार्य तुलसी नें वर्ष 1970 में की थी।यह खूबसूरत परिसर आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों की उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के लिए प्रसिद्ध है। इस विश्वविद्यालय के अलावा, लाडनू में यात्री सुखदेव आश्रम, बालाजी मंदिर, पाबोला, मंगलपुर बागिची, पीठवाले बालाजी, द्रोणाचल अरहम आश्रम, वेंकटेश मंदिर, सुजानगढ़ और सिंघी मंदिर भी जा सकते हैं।
लाडनू में दर्शनीय स्थल
लाडनू की यात्रा के दौरान यात्री रामानंद गौशाला, आदिनाथ मंदिर, चन्द्रसागर स्मारक मंदिर, साध्वी पन्नाजी की समाधि और नीलकंठ महादेव मंदिर घूम सकते हैं। लाडनू से 37 किमी की दूरी पर स्थित सालासर धाम एक प्रमुख धार्मिक केंद्र है। लाडनू के अन्य महत्वपूर्ण आकर्षणों में करंत बालाजी, वीर बालाजी मंदिर, उमरशाहपीर दरगाह तथा आर्य समाज मंदिर हैं।
लाडनू पहुँचना
पर्यटक हवाई, रेल तथा सड़क मार्ग द्वारा लाडनू पहुँच सकते हैं।यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। यह स्थान प्रमुख भारतीय गंतव्यों से रेलमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। लाडनू में एक छोटा सा रेलवे स्टेशन है, तथापि, इस गंतव्य तक पहुंचने के लिए नागौर रेलवे स्टेशन भी एक विकल्प है। लाडनू के लिए जयपुर, अजमेर, सीकर, बीकानेर, कुचामन, अहमदाबाद, इंदौर, और दिल्ली से बसें उपलब्ध हैं।
लाडनू की जलवायु
लाडनू में जलवायु वर्षभर शुष्क बनी रहती है। गर्मी, मानसून और सर्दियां यहां के प्रमुख मौसम हैं। लाडनू में छुट्टियां बिताने के लिए सर्दियों का मौसम अच्छा रहता है क्योंकि इस दौरान यहां मौसम सुखद रहता है।
जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय, लाडनू
लाडनू में स्थित जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय एक प्रसिद्ध शैक्षिक संगठन है। इसकी स्थापना वर्ष 1970 में हुई थी। पहले यह जैन विश्व भारती संस्थान के नाम से जाना जाता था।इस अधिगम केंद्र की स्थापना जैन टेरापंथ प्रमुख आचार्य तुलसी द्वारा की गयी थी।इसका विशाल परिसर एवं आध्यात्मिकता पर आधारित शिक्षा प्रणाली पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
जब हम राजस्थान की बात करते हैं तो आपके जहन में क्या आता है ? सुन्दर महल, ऊंट की राजसी सवारी ? वीर किवदंतियां रोमांटिक कहानियाँ, जीवंत संस्कृति और आकर्षक विरासत? क्या यहां बताई गयी बातों में सिमट गया है राजस्थान शायद आप हां कहें । चाहिए कोई बात नहीं "राजाओं की भूमि" इससे कहीं अधिक है इससे कहीं विस्तृत है।
राजस्थान, एक अविश्वसनीय रूप से सुंदर राज्य भारत के उत्तर पश्चिम में मौजूद है जो अपने आप में कालातीत आश्चर्य का जीवंत उदहारण है, अगर व्यक्ति यात्रा का पारखी है तो उसे यहां जरूर जाना चाहिए। हम इस बात की पूरी गारंटी लेते हैं की वो कभी भी अपनी इस यात्रा को भूल नहीं पायेगा अतः वो यहां एक बार जरूर जाये। प्राचीन वास्तुकला एक चमत्कार के तौर पर राजस्थान को और भी अधिक रॉयल बनाती है जो राजस्थान रॉयल्स की समृद्धि का एक जीवंत उदाहरण है। राजस्थान का शुमार दुनिया की उन जगहों में है जो अपने यहाँ आने वालों को बहुत कुछ देता है । आइये विस्तार से राजस्थान के हर एक पहलुओं पर नज़र डाली जाये।
इस ऐतिहासिक राज्य की स्थलाकृति
देश के पश्चिमोत्तर की ओर स्थित, राजस्थान भारत गणराज्य में क्षेत्र से सबसे बड़ा राज्य है। ये राज्य भारत के 10.4% भाग को अपने में समेटे हुए है जिसमें 342,269 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र शामिल है। गुलाबी नगरी जयपुर यहाँ की राजधानी है जबकि अरावली रेंज में स्थित माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है। राजस्थान का पश्चिमोत्तर भाग काफी शुष्क और रेतीले है जिसमें से अधिकांश भाग को थार रेगिस्तान ने कवर कर रखा है।
राजस्थान की जलवायु
राजस्थान में मौसम को 3 भागों में बांटा गया है जिसमें गर्मी, मानसून और सर्दियों शामिल हैं। पूरा राज्य केवल मॉनसून को छोड़कर बाकी सारे समय शुष्क और सूखा रहता है। राज्य गर्मियों में सर्वाधिक गर्म रहता है इस दौरान यहां का पारा 48 डिग्री तक चला जाता है। पूरे राज्य में केवल माउंट आबू ही वो स्थान है जहां गर्मियों के दौरान मौसम सुखद रहता है।
राजस्थान में आपको कौन सी भाषा सुनने को मिलती है ?
राज्य की मुख्य भाषा राजस्थानी है साथ ही यहां हिन्दी और अंग्रेजी का भी इस्तेमाल व्यापक पैमाने पर किया जाता है। साथ ही यहां की पुरानी पीढ़ी यानी की बुज़ुर्ग आज भी अपनी बोली में सिन्धी भाषा का इस्तेमाल करते है।
रंगारंग संस्कृति और स्वादिष्ट व्यंजन
बात अगर राजस्थान की हो और हम यहाँ की रंगारंग संस्कृति और स्वादिष्ट व्यंजनों की बात न करें तो राजस्थान का जिक्र अधूरा है । राजस्थान राज्य संस्कृति और परंपराओं में आज भी महान समृद्धि का दावा पेश करता है। जबकि राजस्थान के स्थानीय लोगों के बीच संगीत और नृत्य अभ्यास भी बहुत ही जीवंत और आकर्षक हैं, इन बातों के अलावा ये जगह अपने लाजवाब आर्टवर्क के लिए भी जानी जाती है। यहाँ के पारंपरिक कपड़े बहुत ही कलात्मक होते हैं जिसमें शीशे के काम को देखा जा सकता है। कला और उसके प्रेमियों के लिए राजस्थान एक स्वर्ग से कम नहीं है।
राज्य में मनाये जाने वाले प्रमुख त्योहारों में होली, तीज, दीपावली, देवनारायण जयंती, संक्रांति और जन्माष्टमी का विशेष महत्त्व है । इसके अलावा, वर्ष में एक बार मनाया जाने वाला राजस्थानी रेगिस्तान त्योहार, ऊंट मेला , और पशु मेला भी राज्य के प्रमुख उत्सवों में अपनी जगह रखते हैं।
राज्य में पानी के आभाव के चलते आपको यहां ताज़ी सब्जियों में कमी दिखाई देगी। जिसके चलते प्रायः यहां का मुख्य भोजन शुष्क होता है। लेकिन इन बातों के बावजूद यहां के भोजन की जितनी तारीफ की जाये उतनी कम है। अगर यहां के पारंपरिक भोजन की बात की जाये तो इसमें दाल भाटी, बेल गट्टे, रबड़ी, बाजरे की रोटी और लहसुन की चटनी मावा कचौड़ी और बीकानेर ने रसगुल्लों को शामिल किया गया है। अगर आप राजस्थान में हैं तो इन भोजनों को खाने में ज़रा भी संकोच मत कीजिये।
जब आप "राजाओं की भूमि" पर हों तो महलों की सैर करना मत भूलिए!
जैसा की हमने आपको राजस्थान के भूगोल, जलवायु और संस्कृति के बारे में सब कुछ बता दिया है, लेकिन अब जो हम आपको बताने वाले हैं वो कुछ ख़ास है अब हम आपको बताएँगे जब आप इस राज्य में हों तो आप कहाँ अपना डेरा डालें। राजस्थान का हर एक भाग पर्यटन की दृष्टि से अपने आप में रॉयल और खूबसूरत है साथ ही यहाँ ऐसा बहुत कुछ है जो आपका मन मोह लेगा। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर जैसे खूबसूरत शहरों को अपने में समेटने वाले इस राज्य में घूमने से नहीं रोक पाएंगे आप। इसके अलावा यहाँ बांसवाड़ा, कोटा, भरतपुर, बूंदी, विराट नगर, सरिस्का और शेखावाटी जैसे भी शहर हैं जो आपकी यात्रा को और भी अधिक रोचक और यादगार बनाएंगे।
प्रकृति प्रेमियों और वन्य जीवन में रूचि रखने वाले लोगों के लिए भी यहाँ बहुत कुछ है। रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, सरिस्का टाइगर रिजर्व, दरा वन्य प्राणी अभयारण्य और कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य यहाँ आने वाले प्रकृति प्रेमियों को हर वो चीज़ देते हैं जिनकी उनको चाह रहती है। यहाँ कई सारे हिन्दू और जैन मंदिर के अलावा पूजा पाठ के कई महत्त्वपूर्ण स्थान भी हैं। इतिहास और वास्तु में रूचि रखने वालों को भी ये राज्य बहुत कुछ देता है । राजस्थान में स्थित हर एक महल, हवेली, किला एक उम्दा वास्तुकला को दर्शाता है।
अतः भारत में स्थित राजस्थान राज्य एक यादगार डेस्टिनेशन है यहां आप जरूर आइये यहाँ कोई न कोई ऐसी चीज जरूर होगी जो आपकी यात्रा को यादगार बना देगी। अंत में हम प्रसिद्द लैटिन दार्शनिक और बिशप सेंट ऑगस्टाइन की एक पंक्ति से आपको जरूर अवगत कराना चाहेंगे " ये दुनिया एक किताब और जो लोग यात्रा नहीं करते उन्होंने अपने जीवन में केवल एक ही पृष्ठ पढ़ा है।"
नागौर - एक मनोरम शहर
नागौर, राजस्थान राज्य में स्थित एक ऐतिहासिक शहर है। इस शहर को नागा क्षत्रियों के द्वारा स्थापित किया गया था। नागौर शहर, नागौर जिले के मुख्यालय के रूप में जाना जाता है। यह शहर दो लोकप्रिय पर्यटन स्थलों बीकानेर और जोधपुर के बीच में स्थित है।
इतिहास और पौराणिक कथाओं में नागौर
इस जगह के इतिहास के बारे में महान महाकाव्य महाभारत के दिनों से पता लगाया जा सकता है। यह कहा जाता है कि वर्तमान नागौर जिले के कुछ क्षेत्र, उस काल के अहिच्छत्रपुर राज्य का हिस्सा हुआ करते थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महान अर्जुन ने अहिच्छत्रपुर पर विजय प्राप्त की और उसे अपने गुरू को द्रोणाचार्य को भेंट किया।
नागौर में और उसके आसपास क्या - क्या देखने के लिए है ?
यह शहर नागौर किले के लिए प्रसिद्ध है जो एक रेतीला किला है। इसका निर्माण 2 सदी में नागावंशियों द्वारा किया गया था। इस किले में सुंदर महल, फव्वारे, मंदिर और बगीचे हैं। इस किले के अलावा, नागौर में तरकीन दरगाह भी एक लोकप्रिय और आकर्षक पर्यटन स्थल है। यह दरगाह, इस्लाम धर्म के अनुयायियों में विशाल धार्मिक महत्व रखती है।
नागौर सैर का प्लान बना रहे पर्यटक यहां आकर जैन ग्लास मंदिर भी देख सकते हैं जो शहर के कमला टावर के पीछे स्थित है। यह एक काफी अनोखी संरचना है जो पूरी तरह कांच से बनी हुई है। मंदिर में अंदर के हिस्सों में शीशे का काम, यहां के दृश्य को और भी आकर्षक बनाता है। पर्यटक इस मंदिर में जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों के बारे में विशाल आंकड़ें पा सकते हैं। इसके अलावा, साईजी का टंका भी नागौर में भ्रमण के लिए एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है।नागौर शहर अपने मुग्ध कर देने वाले महलों जैसे - हादी रानी महल, दीपक महल, अकबरी महल और रानी महल आदि के लिए भी प्रसिद्ध है। यह सभी महल अपने आसाधारण वास्तुकला और इंटीरियर डिजायन के लिए जाने जाते हैं। नागौर की सैर के दौरान पर्यटक, अमर सिंह राठौड़ की कब्र, वंशीवाला मंदिर, नाथ जी की छतरी और बरली भी देख सकते हैं।
नागौर पहुंचना
नागौर शहर तक वायु, रेल और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस जगह का सबसे नजदीकी घरेलू हवाई अड्डा जोधपुर में
स्थित है। हालांकि, विदेशी पर्यटक नागौर तक दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे से पहुंच सकते हैं जो नागौर का निकटतम इंटरनेशनल एयरबेस है। यह हवाई अड्डा, भारत के के कई गंतव्य स्थलों से नियमित उड़ानों के द्वारा जुड़ा हुआ है।
यात्री रेल से भी अपने गंतव्य स्थल तक पहुंच सकते हैं। नागौर रेलवे स्टेशन प्रतिदिन चलने वाली ट्रेनों के द्वारा जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और दिल्ली से जुड़ा हुआ है। नागौर के लिए अजमेर, बीकानेर, दिल्ली,जोधपुर और जयपुर से बसें भी उपलब्ध हैं, इस तरह यह शहर सड़क मार्ग में भली - भांति जुड़ा हुआ है।
जलवायु
कम बारिश होने के कारण नागौर की जलवायु साल भर गर्म और शुष्क रहती है। यहां के प्राथमिक मौसम गर्मी, मानसून और सर्दी हैं। नागौर में छुट्टियां बिताने का प्लान बनाने वाले पर्यटकों को अक्टूबर से नवंबर के महीने के बीच में आने की सलाह दी जाती है क्यूंकि इस दौरान मौसम अन्य समय की अपेक्षा हल्का सा सर्द और खुशनुमा होता है।
नागौर किला, नागौर
नागौर किला, नागौर शहर में स्थित एक प्रमुख और आकर्षक पर्यटन स्थल है। यह एक सुंदर रेतीला गढ़ है जिसे 2 सदी में बनाया गया था। यह किला बीते युग में लड़े गए कई लड़ाईयों का गवाह है। यह राजस्थान का सबसे अच्छा सपाट भूमि पर बना किला है जो अपनी ऊंची दीवारों और विशाल परिसर के लिए प्रसिद्ध है।
पर्यटक किले के अंदर आकर कई महलों, फव्वारे, मंदिरों और खूबसूरत बगीचों को देख सकते हैं। इस किले का निर्माण नागावंशियों के द्वारा किया गया था और बाद में किले को मोहम्मद बहलीन द्वारा पुनर्निर्मित करवाया गया।किले के तीन मुख्य प्रवेश द्वार हैं, पहला प्रवेश द्वार लोहे और लकड़ी के नुकीले कीलों से मिलकर बना है जो दुश्मनों और हाथियों के हमलों से रक्षा करने के उद्देश्य से बनाया गया था। दूसरा प्रवेश द्वार बीच का पोल है और आखिरी प्रवेश द्वार कचेरी पोल है। आखिरी दरवाजे को प्राचीन काल में नागौर की न्यायपालिका के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
लाडनू - जैन देवताओं की भूमि
राजस्थान के नागौर जिले में स्थित लाडनू एक पर्यटक स्थल है। यह शहर पहले चंदेरी नगरी के नाम से जाना जाता था। यह स्थान परमश्रद्धेय व्यक्तित्व आचार्य तुलसी की जन्मस्थली है,उन्होनें अनुव्रत और जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "लिविंग विद पर्पज" में इस प्रसिद्ध व्यक्तित्व की गणना दुनिया के 15 महानतम व्यक्तियों में की थी।
इतिहास में लाडनू
लाडनू का इतिहास प्रसिद्द महाकाव्य 'महाभारत', के दिनों का है। इस महाकाव्य के वर्णनानुसार 12 वीं सदी में शिशुपाल राज्य नें लाडनू पर विजय प्राप्त की थी।तथा बाद में, 16 वीं सदी में लाडनू, जोधपुर में शामिल हो गया।
जैन मंदिरों की भूमि
यह आध्यात्मिक नगरी विशेष रूप से जैन धर्म स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। दिगंबर जैन बारा मंदिर इस जगह का सबसे लोकप्रिय मंदिर है। यह मंदिर 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। यह मंदिर जैन तीर्थंकरों की संगमरमर की 166 मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। यात्री के लिए यहां एक आर्ट गैलरी भी हैं, जिसमें जैन पांडुलिपी,प्रतिमाओं तथा प्राचीन कलाओं का एक दुर्लभ संग्रह मौजूद है। उत्कीर्ण स्तंभ एवं सुंदर डिजाइन वाले दरवाजे इस प्राचीन मंदिर की शोभा एवं आकर्षण को और अधिक बढ़ा देते हैं।लाडनू की यात्रा के दौरान पर्यटक शांतिनाथ मंदिर तथा चारभुजानाथ मंदिर की भी यात्रा सकते हैं।

लाडनू में दर्शनीय स्थल
लाडनू की यात्रा के दौरान यात्री रामानंद गौशाला, आदिनाथ मंदिर, चन्द्रसागर स्मारक मंदिर, साध्वी पन्नाजी की समाधि और नीलकंठ महादेव मंदिर घूम सकते हैं। लाडनू से 37 किमी की दूरी पर स्थित सालासर धाम एक प्रमुख धार्मिक केंद्र है। लाडनू के अन्य महत्वपूर्ण आकर्षणों में करंत बालाजी, वीर बालाजी मंदिर, उमरशाहपीर दरगाह तथा आर्य समाज मंदिर हैं।लाडनू पहुँचना
पर्यटक हवाई, रेल तथा सड़क मार्ग द्वारा लाडनू पहुँच सकते हैं।यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। यह स्थान प्रमुख भारतीय गंतव्यों से रेलमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। लाडनू में एक छोटा सा रेलवे स्टेशन है, तथापि, इस गंतव्य तक पहुंचने के लिए नागौर रेलवे स्टेशन भी एक विकल्प है। लाडनू के लिए जयपुर, अजमेर, सीकर, बीकानेर, कुचामन, अहमदाबाद, इंदौर, और दिल्ली से बसें उपलब्ध हैं।
लाडनू की जलवायु
लाडनू में जलवायु वर्षभर शुष्क बनी रहती है। गर्मी, मानसून और सर्दियां यहां के प्रमुख मौसम हैं। लाडनू में छुट्टियां बिताने के लिए सर्दियों का मौसम अच्छा रहता है क्योंकि इस दौरान यहां मौसम सुखद रहता है।
जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय, लाडनू
लाडनू में स्थित जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय एक प्रसिद्ध शैक्षिक संगठन है। इसकी स्थापना वर्ष 1970 में हुई थी। पहले यह जैन विश्व भारती संस्थान के नाम से जाना जाता था।इस अधिगम केंद्र की स्थापना जैन टेरापंथ प्रमुख आचार्य तुलसी द्वारा की गयी थी।इसका विशाल परिसर एवं आध्यात्मिकता पर आधारित शिक्षा प्रणाली पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।









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